तमिलनाडु में सरकार गठन का पेच फंसता जा रहा है. विजय की टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन तो गई लेकिन बहुमत से दूर रही. कांग्रेस ने समर्थन दिया लेकिन बहुमत का आंकड़ा तब भी नहीं आया. विजय को अभी भी बहुमत जुटाने में एक-दो दिन का वक्त लग सकता है. इस बीच चर्चा है कि तमिलनाडु में विजय को रोकने के लिए दो ‘सियासी दुश्मन’ हाथ मिला सकते हैं और सरकार बना सकते हैं.
दरअसल, विजय के बहुमत का दावे से राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर संतुष्ट नहीं हैं. विजय ने बुधवार को राज्यपाल से मुलाकात कर 112 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था. लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 का आंकड़ा कैसे हासिल करेंगे, ये बता नहीं सके. सूत्रों के अनुसार, इसलिए विजय का गुरुवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह भी टल गया है.
एक तरफ विजय जहां सरकार बनाने के लिए कोशिशों में जुटे हैं तो दूसरी तरफ दो ‘सियासी दुश्मन’- AIADMK और DMK के साथ आने की अटकलें भी लगने लगी हैं.
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क्या दोनों मिलकर बना सकते हैं सरकार?
तमिलनाडु में इस बार किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. टीवीके को 108 सीटें मिली हैं. दूसरे नंबर पर एमके स्टालिन की डीएमके है, जिसने 59 सीटें जीती हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी की अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पास 47 सीटें हैं. कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं.
अब अगर AIADMK और DMK साथ आती भी हैं तो दोनों के पास 59+47= 106 विधायक होंगे. VCK ने DMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. VCK के पास 2 विधायक हैं. इसके अलावा, लेफ्ट और IUML के पास भी दो-दो विधायक हैं.
अगर सब भी साथ आती हैं तो भी संख्या 112 ही होगी. यानी, AIADMK और DMK साथ आकर भी सरकार नहीं बना पाएंगी. हालांकि, दोनों के साथ आने की संभावना भी न के बराबर है.
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विजय का मामला कहां फंस गया?
टीवीके की 108 सीटों में दो सीटें तो विजय की ही हैं. उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना होगा. इस तरह से टीवीके के पास 107 ही विधायक बचते हैं. टीवीके को कांग्रेस समर्थन दे रही है. लेकिन कांग्रेस के पास खुद 5 विधायक हैं. टीवीके और कांग्रेस मिलकर 112 विधायक होते हैं.
लेफ्ट, IUML और VCK ने विजय की समर्थन देने की बात कही है. तीनों को मिलाकर 6 विधायक हैं. अगर तीनों विजय को समर्थन दे देती हैं तो उनकी सरकार बन सकती है. हालांकि, अब तक तीनों ही पार्टी ने लिखित में औपचारिक सहमति नहीं दी है.
विजय की पार्टी को समर्थन देना है या नहीं? इस पर फैसला करने के लिए VCK और लेफ्ट ने शुक्रवार को बैठक बुलाई है.
तमिलनाडु की राजनीति में अब आगे क्या?
तमिलनाडु में विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ 7 मई को लेने की तैयारी पूरी कर ली थी. उन्होंने राज्यपाल से भी 7 मई को 11:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह करवाने का अनुरोध किया था. हालांकि, राज्यपाल से सरकार बनाने को लेकर हरी झंडी नहीं मिल पाने के कारण शपथ ग्रहण समारोह को टाल दिया गया.
फिलहाल, तमिलनाडु में जिस तरह के सियासी समीकरण बैठ रहे हैं, उससे तो विजय की सरकार ही बनने की संभावना है. भले ही थोड़ा समय लगे.
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