बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने 200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के दिल्ली की एक अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की पीठ ने मंगलवार को मामले की जल्द सुनवाई की मांग पर 11 जून को सुनवाई करने पर सहमति जताई.
सुनवाई के दौरान जैकलीन की ओर से पेश वकील रमीजा हकीम ने अदालत को बताया कि यह एक असामान्य स्थिति है, क्योंकि मूल अपराध में जैकलीन अभियोजन पक्ष की गवाह हैं, जबकि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है.
सरकारी गवाह बनने का आवेदन लिया था वापस
वकील ने यह भी बताया कि जैकलीन ने पहले ईडी मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन ईडी के विरोध के बाद उन्होंने 16 अप्रैल को वह आवेदन वापस ले लिया.
यह याचिका 30 मई को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें अभिनेत्री और कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था मामले की जांच ईडी कर रही है.
30 मई के आदेश में कोर्ट ने क्या कहा?
30 मई के आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने कहा था कि ईडी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर जैकलीन फर्नांडिस के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. इसलिए उनके खिलाफ PMLA की धारा 3 के तहत आरोप तय किए जाने चाहिए, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने का आदेश बरकरार रखा जाए या उसमें हस्तक्षेप किया जाए.


