Mumbai Corporate Life Viral Video: मुंबई… कहने को तो ये शहर कभी सोता नहीं, लेकिन यहां के नौकरीपेशा लोग तो सोने के लिए तरस रहे हैं. आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो तहलका मचा रहा है, जिसमें ट्यूलिप नाम की लड़की ने मुंबई की कॉर्पोरेट लाइफ का ऐसा ‘पोस्टमॉर्टम’ किया है कि हर नौकरीपेशा बंदा उसे अपना हाल-ए-दिल समझ रहा है. उसका कहना है कि यहां 9 से 5 वाली जॉब तो बस कागजों पर है, हकीकत में तो ये 12 घंटे का बंधुआ मजदूरी जैसा खेल बन गया है.
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शाम को जल्दी निकलना जैसे ‘गुनाह’ है (12 Hour Shift Reality)
ट्यूलिप ने बड़े ही देसी और मजेदार अंदाज में बताया कि, अगर कोई कर्मचारी शाम 6 बजे अपना बैग उठाने की जुर्रत कर ले, तो पूरे ऑफिस की नजरें उस पर ऐसे टिक जाती हैं, जैसे उसने कोई डाका डाल दिया हो. कंपनियों का तर्क भी बड़ा अजीब है…बॉस कहते हैं कि आपने दिन में चाय-पानी और लंच का जो ब्रेक लिया, उसकी भरपाई शाम को एक्स्ट्रा रुककर करो. मतलब, सांस लेना भी अब कंपनी के उधार खाते में जाएगा क्या?
ट्रैफिक का टॉर्चर और बिना पैसे का ओवरटाइम (Unpaid Overtime Issues)
मुंबई की जान उसकी लोकल और ट्रैफिक है, लेकिन यही जान निकाल भी देती है. वीडियो में बताया गया कि दफ्तर की थकान तो एक तरफ, लेकिन घर पहुंचने तक जो ट्रैफिक का ‘जहर’ पीना पड़ता है, वो इंसान को बेहद थका देता है. ऊपर से सितम ये कि घंटों एक्स्ट्रा काम करने के बावजूद फूटी कौड़ी नसीब नहीं होती. इसे ‘डेडीकेशन’ का नाम देकर कर्मचारी का तेल निकाला जाता है. सच तो ये है कि यहां लोग काम के लिए नहीं जी रहे, बल्कि बस जीने के लिए काम किए जा रहे हैं.
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)


