ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय सेना के पूर्व डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इस ऑपरेशन को भारत के संकल्प, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का स्पष्ट संदेश बताया. लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य पूरी तरह साफ और स्पष्ट था और इसे बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया गया. यह ऑपरेशन भारत की बदलती रणनीति का संकेत है, जहां अब पूरे सरकार स्तर (Whole-of-Government Approach) पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की जा रही है.
उन्होंने दुष्यंत कुमार की पंक्तियां दोहराते हुए कहा, ‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.’
तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक ट्राई-सर्विसेज जॉइंट ऑपरेशन था, जिसमें थल, जल और वायु सेना ने मिलकर काम किया. यह भारत की सैन्य क्षमताओं के बेहतर तालमेल और तैयारियों को दर्शाता है.
‘आतंक के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं’
पूर्व डीजीएमओ के अनुसार, इस ऑपरेशन ने साफ संदेश दिया कि अब आतंकवादियों या उनके समर्थकों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है. भारत जरूरत पड़ने पर कहीं भी जवाब दे सकता है.
आत्मनिर्भर भारत की ताकत दिखी
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए हथियारों और तकनीक का बड़ा हिस्सा स्वदेशी (Made in India) था. इससे साबित हुआ कि आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) अब रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फोर्स मल्टीप्लायर बन चुका है.
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि मौजूदा दौर में जहां संघर्ष लंबे चलते हैं, वहीं भारत ने तेज और सटीक हमला किया. अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल किए और फिर पाकिस्तान के अनुरोध पर ऑपरेशन को रोक दिया.
‘यह अंत नहीं, शुरुआत है’
उन्होंने साफ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लंबी लड़ाई का नया अध्याय है.
आतंकवाद के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
उन्होंने दोहराया कि भारत का रुख स्पष्ट है, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लगातार जारी रहेगी और इसे जड़ से खत्म करने के लिए हर कदम उठाया जाएगा.


